नई दिल्ली:
दिवाली और महापर्व छठ पर घर पहुंचकर अपनों के साथ दीये जलाने की खुशी अब आम मुसाफिरों के लिए किसी बुरे सपने में बदल चुकी है। इस बार सफर नहीं, बल्कि घर जाने की चाहत रखने वाले करोड़ों यात्रियों के सब्र और जेब दोनों का कड़ा इम्तिहान हो रहा है। जमीन से लेकर आसमान तक, घर वापसी के हर रास्ते पर मानों ‘फेस्टिवल टैक्स’ का खुला डाका डल रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि हर आम मुसाफिर के मुंह से बस एक ही सवाल निकल रहा है—‘घर कैसे जाएं भाई?’
दिवाली-छठ पर घर वापसी की जंग: हवाई सफर में आसमान छूते किराए से जेब ढीली, ट्रेनों में ‘नो-रूम’ के बीच स्पेशल ट्रेनें बनीं बड़ा सहारा
आसमान छूता हवाई किराया: ₹4,500 की टिकट ₹25,000 में
हवाई सफर की ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ इस त्योहारी सीजन में आम आदमी के बजट पर सबसे बड़ा प्रहार साबित हो रही है। सामान्य दिनों में जो टिकट महज ₹4,500 से ₹5,000 के दायरे में मिल जाती थी, त्योहार के पीक दिनों में वही सीटें ₹20,000 से ₹25,000 के पार बिक रही हैं। महानगरों से गृह राज्यों की ओर जाने वाली उड़ानों के दाम 3 से 4 गुना तक उछल चुके हैं। स्थिति यह है कि एक सामान्य परिवार के दो सदस्यों का हवाई किराया उनकी महीने भर की पूरी बचत को चट कर रहा है।
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ट्रेनों में ‘नो-रूम’: महीनों पहले से वेटिंग और रिग्रेट
रेलवे से घर पहुंचने की आस लगाए बैठे यात्रियों के हाथ पूरी तरह खाली हैं। दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत और बेंगलुरु से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की ओर जाने वाली तमाम प्रमुख नियमित ट्रेनों में महीनों पहले से सीटें पैक हैं। स्लीपर से लेकर थर्ड एसी तक की बोगियों में ‘नो-रूम’ और ‘रिग्रेट’ की स्थिति है। तत्काल कोटे की टिकटें खुलने के कुछ सेकंड के भीतर गायब हो रही हैं, जिससे आम मुसाफिरों के लिए ट्रेन से कन्फर्म सीट पाना लगभग नामुमकिन हो चुका है।
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स्लीपर बसों में दोगुना-तिगुना भाड़ा: सड़क पर भी मजबूरी का सौदा
ट्रेन और फ्लाइट से निराश होकर जब यात्री सड़क मार्ग का रुख कर रहे हैं, तो निजी बस ऑपरेटर उनकी मजबूरी को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लंबी दूरी की स्लीपर और एसी बसों का किराया दोगुने से तीन गुना तक बढ़ा दिया गया है। सरकारी साधारण बसों के किराए में हालिया बढ़ोतरी के बाद निजी बस संचालकों ने भी मनमाने दाम वसूलने शुरू कर दिए हैं। ₹800 से ₹1,000 में होने वाला स्लीपर बस सफर अब ₹2,000 से ₹2,500 तक पहुंच गया है।
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बेबसी की मार झेल रहे मुसाफिर
परदेस में साल भर पसीना बहाने वाले कामगार, छात्र और नौकरीपेशा लोग आज असमंजस के भंवर में हैं। टिकट खिड़कियों से लेकर ट्रैवल पोर्टल्स तक केवल एक ही तस्वीर दिख रही है—खाली होती जेबें और गहराती मायूसी। मुसाफिरों का कहना है कि त्योहारों के मौके पर परिवहन के हर साधन की बेलगाम लूट पर प्रशासनिक नियंत्रण की कमी सबसे ज्यादा खलती है। जब घर जाने के सारे दरवाजे इतने खर्चीले हो जाएं, तो त्योहार की मिठास रास्ते के इस तनाव में ही घुल जाती है।
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रेल मार्ग: पूर्वांचल रूट की ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं, स्पेशल ट्रेनें बनीं सहारा
त्योहारी सीजन में रायपुर और रांची रेल मंडल से उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ी हुई हैं।
रायपुर रेल मंडल: पटना, गया, बरौनी और राजेंद्र नगर की ओर जाने वाली साउथ बिहार, गोंदिया-बरौनी और सारनाथ जैसी ट्रेनों में स्लीपर से लेकर एसी तक सीटें पूरी तरह फुल हैं। वेटिंग लिस्ट 50 के पार जा चुकी है। 14 नवंबर को पुणे जाने वाली हटिया-पुणे, आजाद हिंद और दुरंतो जैसी ट्रेनों में ‘नो-रूम’ की स्थिति है।
रांची रेल मंडल की स्थिति: गरीब रथ (12877), हटिया-पूर्णिया कोर्ट (18626), हटिया-इस्लामपुर (18624), रांची-गोरखपुर (18629) और राउरकेला-जयनगर (18105) जैसी ट्रेनों में स्लीपर और एसी श्रेणियों में 100 से अधिक वेटिंग या फिर टिकट बुकिंग बंद (रिग्रेट) हो चुकी है।

रेलवे द्वारा चलाई जा रही स्पेशल ट्रेनों में अब भी कन्फर्म सीटें उपलब्ध हैं:
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08616 रांची-शालीमार स्पेशल: 4, 6 और 11 नवंबर को स्लीपर में 250 से ज्यादा और एसी में पर्याप्त सीटें उपलब्ध।
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09620 रांची-अजमेर स्पेशल: 1 और 8 नवंबर को थर्ड एसी में 140 से अधिक सीटें खाली।
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08661 रांची-अलीपुरद्वार स्पेशल: 2 और 9 नवंबर को स्लीपर में 500 से अधिक सीटें रिक्त।
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08637 हटिया-बेंगलुरु स्पेशल: 4 और 11 नवंबर को थर्ड एसी इकोनॉमी में 200 से अधिक बर्थ खाली।
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02877 रांची-आनंद विहार स्पेशल: 7 नवंबर को थर्ड एसी में 32 सीटें उपलब्ध।
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सड़क मार्ग: छत्तीसगढ़ में बस सफर पर महंगाई की मार, किराया 75% तक बढ़ा
ट्रेन में टिकट न मिलने पर आम तौर पर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग बसों का रुख करता है, लेकिन इस बार वहां भी राहत नहीं है। राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने प्रदेश की करीब 5 हजार साधारण यात्री बसों का किराया ₹1 प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर सीधे ₹1.75 प्रति किलोमीटर कर दिया है। शुरुआती 5 किमी का न्यूनतम भाड़ा भी ₹8 से बढ़ाकर ₹10 कर दिया गया है।
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हवाई सफर: ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ का आतंक, रांची और रायपुर की उड़ानें 3 गुना तक महंगी
मजबूरी में फ्लाइट टिकट तलाश रहे मुसाफिरों पर एयरलाइंस कंपनियां भारी पड़ रही हैं। मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी का फायदा उठाते हुए कंपनियों ने टिकट दरें सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना तक बढ़ा दी हैं।
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रांची आने वाली उड़ानों का हाल:
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भुवनेश्वर-रांची: सामान्य किराया ₹4,533 के मुकाबले 6 नवंबर को ऐतिहासिक उछाल के साथ ₹25,665 तक पहुंच गया।
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मुंबई-रांची: ₹8,484 की टिकट 6 नवंबर को ₹22,730 में मिल रही है।
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अहमदाबाद-रांची: ₹7,822 की जगह सीधे ₹21,734 तय।
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दिल्ली-रांची: ₹7,314 का टिकट बढ़कर ₹15,349 से ₹16,219 तक पहुंच चुका है।
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हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु: इन शहरों से रांची का किराया ₹16,000 से लेकर ₹19,000 के पार चल रहा है।
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रायपुर से प्रमुख महानगरों का हवाई किराया:
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रायपुर-पुणे: सामान्य ₹6,000-7,500 के मुकाबले अब ₹19,488 से ₹20,000।
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रायपुर-मुंबई: ₹5,500 का टिकट उछलकर ₹14,356 से ₹15,500।
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रायपुर-दिल्ली: ₹9,300 से ₹12,000 के बीच।
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कोलकाता व हैदराबाद: क्रमशः ₹14,000 और ₹13,000 तक दाम पहुंचे।
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इसके अलावा, टिकट री-शेड्यूल या कैंसिल कराने पर एयरलाइंस 2,000 से 3,500 रुपये तक पेनल्टी वसूल रही हैं, जिससे यात्रियों के लिए कोई भी आकस्मिक बदलाव भारी पड़ रहा है।त्योहारों पर पटाखों को लेकर झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नए दिशा-निर्देश जारी, उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
घर जाने की खुशी पर आर्थिक तनाव भारी
त्योहारों पर अपने परिजनों के पास पहुंचने की लालसा रखने वाले नौकरीपेशा, मजदूर और छात्रों के सामने इस बार बजट सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। जहां आम आदमी बस और ट्रेन के बीच उलझा है, वहीं विमानन क्षेत्र का अनियंत्रित किराया परिवारों के त्योहारी बजट को बिगाड़ रहा है। ऐसे में समय रहते स्पेशल ट्रेनों की सीटों का लाभ उठाना ही यात्रियों के लिए सबसे सुरक्षित और किफायती रास्ता नजर आ रहा है।


