- कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए मातृभाषा में तैयार हो रही हैं ‘बिग बुक’, अभ्यास पुस्तिकाएँ और शिक्षक संदर्शिका
- डाइट जशपुर में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) के सहयोग से चल रहा है चार दिवसीय विशेष अभियान
जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को अधिक प्रभावी और सरल बनाने के लिए एक सराहनीय पहल चल रही है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जशपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के द्वितीय चरण हेतु कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए सादरी भाषा में शिक्षण-सामग्री विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह चार दिवसीय कार्यशाला 2 नवंबर से 5 नवंबर 2026 तक सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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स्थानीय संस्कृति और परिवेश को मिल रहा बढ़ावा
कार्यशाला के दौरान जिला स्रोत समूह (DRG) के सदस्यों ने बच्चों के स्थानीय संदर्भ, संस्कृति और उनके परिवेश को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए शिक्षण-सामग्री तैयार की है। इस प्रक्रिया में 12 ‘बिग बुक’ (बड़ी किताबें) के साथ-साथ बच्चों के लिए आकर्षक अभ्यास पुस्तिकाएँ और शिक्षकों के मार्गदर्शन के लिए शिक्षक संदर्शिका तैयार करने का कार्य पूरी मेहनत और तन्मयता के साथ किया गया।

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इन दिग्गजों का मिल रहा मार्गदर्शन
इस पूरी गतिविधि को सुचारू रूप से चलाने में डाइट जशपुर का अहम योगदान रहा है। डाइट की उप-प्राचार्या श्रीमती संगीता भोई, श्री पैंकरा और श्री राठौर के कुशल मार्गदर्शन में सामग्री विकास की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही, ‘लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन’ (LLF) की राज्य, जिला और ब्लॉक स्तरीय टीम के सदस्यों ने इसमें महत्वपूर्ण अकादमिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया है।

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बगीचा और कुनकुरी के 202 स्कूलों में चल रहा है कार्यक्रम
यह सामग्री विकास कार्यशाला जशपुर जिले के दो चयनित विकासखंडों—बगीचा और कुनकुरी में संचालित ‘नींव बहुभाषी शिक्षा (MLE) कार्यक्रम’ का एक मुख्य हिस्सा है। इन दोनों ही क्षेत्रों में बच्चों की मुख्य मातृभाषा ‘सादरी’ है, जिसका उपयोग बच्चों को विद्यालयी भाषा (हिंदी) में आसानी से दक्षता हासिल करने के लिए एक मजबूत सेतु (पुल) के रूप में किया जा रहा है।

वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-2027 में यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन तथा LLF के तकनीकी सहयोग से दोनों ब्लॉकों के कुल 202 प्राथमिक विद्यालयों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
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कक्षाओं में प्रभावी उपयोग पर जोर
इस द्वितीय चरण के सामग्री निर्माण से पहले, बगीचा और कुनकुरी में 5 दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण और संकुल अकादमिक समन्वयकों (CAC) का 3 दिवसीय सहयोगात्मक पर्यवेक्षण प्रशिक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
प्रथम चरण में जिला स्रोत समूह द्वारा तैयार की गई सामग्री—जैसे अभ्यास पुस्तिकाएँ, शिक्षक संदर्शिका, बिगबुक, कविता चार्ट, कहानी पुस्तकें, चित्र चार्ट और ग्रिड कार्ड—का कक्षाओं में शानदार परिणाम देखने को मिला है। अब इस द्वितीय चरण की सामग्री के तैयार होने के बाद, जिला शिक्षा विभाग और LLF टीम की मदद से संकुल व विकासखंड अकादमिक समन्वयकों द्वारा शालाओं के अवलोकन के दौरान इसका कक्षाओं में और अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।


