राज्य में स्कूली बच्चों की शिक्षा की वास्तविक स्थिति और सीखने के स्तर का आकलन करने के लिए वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER) सर्वे की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में वॉलंटियर्स घर-घर जाकर सर्वे का कार्य करेंगे। शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा इसके लिए छात्र-अध्यापकों और स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे मौके पर निष्पक्ष और सटीक तरीके से शैक्षणिक स्तर का मूल्यांकन कर सकें।
सर्वे का मुख्य केंद्र स्कूल नहीं, बल्कि बच्चों का घर होगा। इसका मूल उद्देश्य यह पता लगाना है कि बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं या नहीं, और यदि वे अध्ययनरत हैं, तो क्या वे अपनी उम्र व कक्षा के अनुरूप बुनियादी ज्ञान हासिल कर पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि घर के सहज माहौल में माता-पिता की मौजूदगी में किया गया मूल्यांकन बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमता को सामने लाने में बेहद मददगार साबित होता है।
इस सर्वे में प्रारंभिक बाल्यावस्था से लेकर किशोरावस्था तक के बच्चों को शामिल किया गया है। छोटे बच्चों की प्री-प्राइमरी और आंगनबाड़ी में सहभागिता की जांच की जाएगी, जबकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों के बुनियादी पठन-पाठन व गणितीय कौशल को परखा जाएगा। इसके साथ ही किशोर वर्ग के विद्यार्थियों में डिजिटल साक्षरता, स्मार्टफोन के उपयोग और आधुनिक तकनीकों की समझ से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। साथ ही, बच्चों के पारिवारिक वातावरण और अभिभावकों की शैक्षिक स्थिति का विवरण भी दर्ज होगा।
सर्वेक्षण को पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए घरों के चयन हेतु विशेष तकनीकों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्र का नजरी नक्शा तैयार कर निर्धारित फार्मूले के अनुसार घरों का चयन होगा। संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा विभाग और अकादमिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी। सर्वे से मिलने वाले निष्कर्ष भविष्य में राज्य की शैक्षणिक नीतियों को सुदृढ़ बनाने और शिक्षण व्यवस्था में जरूरी सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


