नई दिल्ली:
केंद्र सरकार का पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग 1 से 30 नवंबर, 2026 तक देशव्यापी ‘डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान-5’ आयोजित करने जा रहा है। देश के 2000 से अधिक जिलों और शहरों में आयोजित होने वाला यह अभियान अब तक का सबसे बड़ा डीएलसी महाभियान होगा। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ (चेहरे की पहचान) तकनीक के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग पेंशनरों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है।
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विभाग ने इस बार ‘सैचुरेशन मॉडल’ (पूर्ण कवरेज मॉडल) अपनाते हुए कुल 2.30 करोड़ डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जारी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें से अकेले 1.50 करोड़ प्रमाण पत्र केवल फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक से तैयार किए जाएंगे। महीने भर चलने वाले इस अभियान को ‘संपूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण के साथ 19 प्रमुख पेंशन वितरण बैंक, 785 जिला डाकघर, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, 56 पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सीजीडीए, रेलवे, डीओटी, ईपीएफओ और राज्य सरकारें मिलकर संचालित करेंगी।
बुजुर्गों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए चेहरे से पहचान करने वाली यह तकनीक एंड्रॉइड और आईओएस दोनों मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और तकनीकी टीमें बैकएंड सपोर्ट प्रदान करेंगी, ताकि स्मार्टफोन के कैमरे के जरिए कुछ ही मिनटों में प्रमाण पत्र सत्यापित हो सके। अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए दूरदर्शन, आकाशवाणी, पीआईबी के साथ-साथ एसएमएस, सोशल मीडिया (#डीएलसीसीकैंपेन5), विशेष जिंगल्स और लघु फिल्मों का सहारा लिया जाएगा।
इस अभियान को मात्र एक प्रशासनिक प्रक्रिया न बनाकर सेवा उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, जहां शिविरों में स्वास्थ्य जांच और विवरण अपडेट जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। चलने-फिरने में असमर्थ और अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों को उनके घर पर ही डोरस्टेप सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनों को मौके पर ही दूर करने के लिए विशेष ‘शिकायत निवारण अधिकारी’ तैनात रहेंगे। पेंशन बाहुल्य क्षेत्रों में लगने वाले ‘मेगा कैंपों’ की समीक्षा और निगरानी के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं राज्यों का दौरा कर जमीनी स्तर पर अभियान की कमान संभालेंगे।


